पटवारियों का अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी, विधायक से मिलकर बताई समस्याएं
जशपुर. पटवारी संगठन के जिला पदाधिकारियों ने गुरुवार को कांग्रेस भवन में विधायक विनय भगत से मुलाकातकर उन्हें अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। विधायक ने पटवारियों की मांग को शासन स्तर पर प्रमुखता से रखने का आश्वासन दिया है। संघ के जिलाध्यक्ष प्रवीण तिर्की ने विधायक को बताया कि किसानों और शासन के समस्त काम को सम्पन्न करके हड़ताल पर जाने को मजबूर हैं। नौ मांगो में से कई मांग की फाइल विगत कई सालों से मंत्रालय में अटकी पड़ी है। राजस्व विभाग का सारा काम ऑनलाइन चल रहा, जिसके लिए कम्प्यूटर, प्रिंटर, स्केनर आदि की आवश्यकता पड़ती है। शासन ने प्रत्येक तहसील में दो से चार कम्प्यूटर ही दिया है। मजबूरन पटवारी अपने वेतन के राशि से लैपटाप और नेट पैक की व्यवस्था कर शासन का काम करने को विवश है, जबकि शासन ने मांगो को सही मानते हुए बजट में लैपटाप का प्रावधान किया था। इसी तरह नेट भत्ता प्रति माह एक हजार रुपए को उचित मानते हुए संचालक भू -अभिलेख से फाइल चली पर आज तक आदेश जारी न हो सका। इसी तरह विभागीय कार्य में गलती होने पर सीधे थाने जाकर प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रथा सामान्य हो गयी है। इसके संबंध में पुलिस महानिरीक्षक द्वारा एक सप्ताह में विभागीय जांच के बाद प्राथमिकी पर कार्यवाही करने के निर्देश दिए थे। संघ की मांग है कि पुलिस महानिरीक्षक के निर्देशों को सामान्य प्रशासन विभाग जारी करे। संघ के जिला अध्यक्ष प्रवीण तिर्की ने यह भी बताया कि पटवारी का पद ऐसा है जो वह उसी पद पर ही सेवानिवृत्त हो जाता है। शासन ने 20 वर्ष सेवा या 45 वर्ष उम्र के आधार पर पदोन्नति का प्रावधान किया था, जिसका कुछ वरिष्ठ पटवारियों को लाभ भी मिला। बाद में इस प्रावधान को भी बंद कर दिया। बहुत से वरिष्ठ पटवारी नायब तहसीलदार का वेतन ले रहे पर दुर्भाग्य की बात है कि वे पटवारी के पद पर ही कार्यरत हंै। 1959 में पटवारियों के लिए नियमावली बनाया था, जिसमें पटवारी को मुख्यालय में रहना अनिवार्य था जो उचित था, क्योंकि उस समय सड़क और संचार की व्यवस्था नहीं थी। तब प्रशासन का प्रतिनिधि के तौर पर पटवारी को मुख्यालय में रहना सही था। आज जब समय के साथ परिवहन एवं संचार व्यवस्था विकसित हो चुकी है, तब मुख्यालय में रहने की बाध्यता कोई आवश्यक नहीं है।
साभार: दैनिक भास्कर

